गीतकार : साहिर लुधियानवी
गायक : लता मंगेशकर - किशोर कुमार
संगीतकार : खय्याम
चित्रपट : कभी कभी (१९७६)
तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती
नज़ारे हम क्या देखें
तुझे मिलके भी प्यास नहीं घटती
नज़ारे हम क्या देखें
पिघले बदन तेरी तपती निगाहों से
शोलों की आँच आए बर्फ़ीली राहों से
लगे कदमों से आग लिपटती
नज़ारे हम क्या देखें...
रंगों की बरखा है खुशबू का साथ है
किसको पता है अब दिन है कि रात है
लगे दुनिया ही आज सिमटती
नज़ारे हम क्या देखें...
पलकों पे फैला तेरी पलकों का साया है
चेहरे ने तेरे मेरा चेहरा छुपाया है
तेरे जलवों की धुँध नहीं छँटती
नज़ारे हम क्या देखें...
नज़ारे हम क्या देखें
तुझे मिलके भी प्यास नहीं घटती
नज़ारे हम क्या देखें
पिघले बदन तेरी तपती निगाहों से
शोलों की आँच आए बर्फ़ीली राहों से
लगे कदमों से आग लिपटती
नज़ारे हम क्या देखें...
रंगों की बरखा है खुशबू का साथ है
किसको पता है अब दिन है कि रात है
लगे दुनिया ही आज सिमटती
नज़ारे हम क्या देखें...
पलकों पे फैला तेरी पलकों का साया है
चेहरे ने तेरे मेरा चेहरा छुपाया है
तेरे जलवों की धुँध नहीं छँटती
नज़ारे हम क्या देखें...
No comments:
Post a Comment