Tuesday, 13 December 2016

फिर छिड़ी रात, बात फूलों की


गीतकार : मखदुम मोहिद्दिन 
गायक : लता - तलत अजीज 
संगीतकार : खय्याम 
चित्रपट : बाजार (१९८२) 

म: (फिर छिड़ी रात, बात फूलों की
फ़:  रात है या बारात फूलों की) \-२

फ़: फूल के हैं फूल के गजरे \-२
   शाम फूलों की, रात फूलों की

म: आपका साथ\-साथ फूलों का \-२
   आपकी बात बात फूलों की

फ़: फूल खिलते रहेंगे दुनिया में \-२
   रोज़ निकलेगी बात फूलों की

म: नज़रें मिलती हैं जाम मिलते हैं \-२
   मिल रही है हयात फूलों की

म/फ़: ये महकती हुई ग़ज़ल मख़दूं \-२
   जैसे सहरा में रात फूलों की

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