गीतकार : मजरुह सुलतानपुरी
गायक : किशोर कुमार
संगीतकार : सचिन देव बर्मन
चित्रपट : चलती का नाम गाडी (१९५८)
एक लड़की भीगी भागी सी,
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
दिल ही दिल में
जली जाती हैं,
बिगड़ी बिगड़ी
चली आती हैं
जली जाती हैं,
बिगड़ी बिगड़ी
चली आती हैं
झुंझलाती हुई,
बलखाती हुई,
सावन की सुनी रात में
बलखाती हुई,
सावन की सुनी रात में
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
एक लड़की भीगी भागी सी
डगमग डगमग
लहकी लहकी,
भूली भटकी,
बहकी बहकी
लहकी लहकी,
भूली भटकी,
बहकी बहकी
मचली मचली,
घर से निकली,
पगली सी काली रात में
घर से निकली,
पगली सी काली रात में
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
एक लड़की भीगी भागी सी
तन भीगा हैं,
सर गीला हैं,
उसका कोई पेंच भी ढीला हैं
तनती झुकती,
चलती रुकती,
निकली अंधेरी रात में
सर गीला हैं,
उसका कोई पेंच भी ढीला हैं
तनती झुकती,
चलती रुकती,
निकली अंधेरी रात में
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
एक लड़की भीगी भागी सी,
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं
सोती रातों में जागी सी
मिली एक अजनबी से,
कोई आगे ना पीछे
तुम ही कहो ये कोई बात हैं