Friday, 25 November 2016

कई बार यूँ भी देखा है



गीतकार : योगेश 
गायक : मुकेश 
संगीतकार : सलील चौधरी 
चित्रपट : रजनीगंधा (१९७४)

कई बार यूँ भी देखा है
ये जो मन की सीमा रेखा है
मन तोड़ने लगता है
अनजानी प्यास के पीछे
अनजानी आस के पीछे
मन दौड़ने लगता है

राहों में, राहों में, जीवन की राहों में
जो खिले हैं फूल, फूल मुस्कुरा के
कौन सा फूल चुरा के
रखूँ लूँ मन में सज़ा के
कई बार यूँ भी...

जानूँ ना, जानूँ ना, उलझन ये जानूँ ना
सुलझाऊं कैसे कुछ समझ ना पाऊं
किसको मीत बनाऊ
किसकी प्रीत भुलाऊं
कई बार यूँ भी...





No comments:

Post a Comment